Ghalib Shayari Best Of all Time (मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी)

Ghalib Shayari Best Of all Time

Mirza Ghalib Shayari Best of all time

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है 

ishq ne gaalib nikamma kar diya.
varna ham bhee aadamee the kaam ke..

वो आए घर में हमारे, खुदा की क़ुदरत हैं!
कभी हम उमको, कभी अपने घर को देखते हैं
Ghalib Shayari Best Of all Time
Ghalib Shayari Best Of all Time

Tere vaade par jiye ham
to yah jaan,jhooth jaana
ki khushee se mar na jaate
agar etabaar hota ..

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन 

दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है 

Tum apane shikave kee baaten
na khod khod ke poochho
hazar karo mire dil se
ki us mein aag dabee hai..


इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया 

वर्ना हम भी आदमी थे काम के 
Tune kasam may-kashee kee khaee hai ‘gaalib’
teree kasam ka kuchh etibaar nahee hai..!
इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा 

लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं 
Mohabbat mein nahee phark jeene aur marane ka
Usee ko dekhakar jeete hai jis ‘kaafir’ pe dam nikale..!

Ghalib shayari bewafa


मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का 

उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले 
Magar likhavae koee us ko khat
To haum se likhavae
Huee subh aur
Gharase kaan par rakh kar kalam nikale..

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले 

बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले 

Marate hai aarazoo mein marane kee
Maut aatee hai par nahee aatee,
Kaaba kis munh se jaoge ‘gaalib’
Sharm tumako magar nahee aatee .

Durga Chalisa pdf – Shri Durga Chalisa in Hindi / English 2021

उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़ 

वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है 
Khaan mayakhaane ka daravaaza ‘gaalib’ aur kahaan vaij
par itana jaanate hai kal vo jaata tha ke ham nikale..

Ghalib shayari in english

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता 

अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता 
Bana kar phakeeron ka ham bhes gaalib
Tamaasha-e-ahal-e-karam dekhate hai..

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल 

जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है 

Ghalib Shayari Best Of all Time

Tere vaade par jiye ham, to yah jaan jhooth jaana,
Ki khushee se mar na jaate, agar etabaar hota .

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना 

दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना 
Un ke dekhe se jo aa jaatee hai munh par raunaq.
Vo samajhate hain ki beemaar ka haal achchha hai..

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब' 

कि लगाए न लगे और बुझाए न बने 
kaaba kis munh se jaoge Gaalib.
sharm tum ko magar nahin aatee..
न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता 

डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता 
dil-e-naadaan tujhe hua kya hai.
aakhir is dard kee dava kya hai..
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है। 

आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।।
ishq par jor nahin hai ye vo aatish gaalib.
ki lagaaye na lage aur bujhaaye na bujhe..
इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'।
कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे।।
Esharat-e-qatara hai dariya mein fana ho jaana.
dard ka had se guzarana hai dava ho jaana..
इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना।
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।।
Dil se teree nigaah jigar tak utar gaee.
donon ko ik ada mein razaamand kar gaee..

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दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई।
दोनों को इक अदा में रज़ामंद कर गई।। 
dard minnat-kash-e-dava na hua.
main na achchha hua bura na hua..
दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ।
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ।।
daaah ko chaahie ik umr asar hote tak.
kaun jeeta hai tiree zulf ke sar hote tak..
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक।
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक।।
Qarz kee peete the may lekin samajhate the ki haan.
Rang laavegee hamaaree faaqa-mastee ek din..
क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हां।
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन।।
Mohabbat mein nahin hai farq jeene aur marane ka.
Usee ko dekh kar jeete hain jis kaafir pe dam nikale..
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का।
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले।।
Kitana khauph hota hai shaam ke andheron mein.
Poochh un parindon se jinake ghar nahin hote..
कितना ख़ौफ होता है शाम के अंधेरों में।
पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते।।
hazaaron khvaahishen aisee ki har khvaahish pe dam nikale.
bahut nikale mire aramaan lekin phir bhee kam nikale..
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले।
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।।
Hain aur bhee duniya mein sukhan-var bahut achchhe.
Kahate hain ki gaalib ka hai andaaz-e-bayaan aur..
हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे।
कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और।।
Na tha kuchh to khuda tha kuchh na hota to khuda hota.
Duboya mujh ko hone ne na hota main to kya hota..
न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता।
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता।।
Dard jab dil mein ho to dava keejie.
Dil hee jab dard ho to kya keejie..
दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए।
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए।। 
हाथों की लकीरों पे मत जा ऐ गालिब। 
नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते।।
Haathon kee lakeeron pe mat ja ai gaalib.
Naseeb unake bhee hote hain jinake haath nahin hote..
रही न ताक़त-ए-गुफ़्तार और अगर हो भी।
तो किस उम्मीद पे कहिये के आरज़ू क्या है।।
Rahi na taaqat-e-guftaar aur agar ho bhee.
To kis ummeed pe kahiye ke aarazoo kya hai..

Ranj Se Khugar Hua Insaan To Mit Jata Hain Ranj, Mushkile Mujh Par Padi Itani Ki Asaan Ho Gayi..

 रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज। 
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं।। 

“Na Suno Gar Bura Kahe Koi, Na Kaho Gar Bura Kare Koi.”

दिया है दिल अगर उस को , बशर है क्या कहिये

हुआ रक़ीब तो वो , नामाबर है , क्या कहिये

यह ज़िद की आज न आये और आये बिन न रहे
काजा से शिकवा हमें किस क़दर है , क्या कहिये

ज़ाहे -करिश्मा के यूँ दे रखा है हमको फरेब
की बिन कहे ही उन्हें सब खबर है , क्या कहिये

समझ के करते हैं बाजार में वो पुर्सिश -ऐ -हाल
की यह कहे की सर -ऐ -रहगुज़र है , क्या कहिये

तुम्हें नहीं है सर-ऐ-रिश्ता-ऐ-वफ़ा का ख्याल
हमारे हाथ में कुछ है , मगर है क्या कहिये

कहा है किस ने की “ग़ालिब ” बुरा नहीं लेकिन
सिवाय इसके की आशुफ़्तासार है क्या कहिये ”

“Rok Lo Gar Galat Chale Koi, Baksh Do Gar Kahta Kare Koi !!”

“रोक लो गर ग़लत चले कोई,
बख़्श दो गर ख़ता करे कोई !!”

“Tere Vade Par Jiye Ham To Yh Jaan, Jhuth Jana Ki Khusi Se Mar Na Jate Agar Aitbaar Hota.”

“तेरे वादे पर जिये हम
तो यह जान,झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते
अगर एतबार होता”

“Bheege Hui Se Raat Me Jab Yaad Jal Uthi, Badal Sa Ek Nichod Ke Sirhane Rakh Liya !!”

Ghalib shayari on love

भीगी हुई सी रात में जब याद जल उठी,
बादल सा इक निचोड़ के सिरहाने रख लिया !!”

“Kuch Lamhe Hamne Kharch Kiye The Mile Nhi, Sara Hisab Jod Ke Sirhane Rakh Liya !!”

“कुछ लम्हे हमने ख़र्च किए थे मिले नही,
सारा हिसाब जोड़ के सिरहाने रख लिया !!”

“Vo Raaste Jin Pe Koi Silvat Na Pad Saki, Un Rasto Ko Mod Ke Sirhane Rakh Liya !!

“वो रास्ते जिन पे कोई सिलवट ना पड़ सकी,
उन रास्तों को मोड़ के सिरहाने रख लिया !!”

“हम जो सबका दिल रखते हैं
सुनो, हम भी एक दिल रखते हैं”
“इक शौक़ बड़ाई का अगर हद से गुज़र जाए
फिर ‘मैं’ के सिवा कुछ भी दिखाई नहीं देता”
“ज़िन्दग़ी में तो सभी प्यार किया करते हैं,
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा !!”
“Dil-Ae-Naad Tujhe Hua Kya Hai Akhir Is Dard Ki Dawa Kya Hai”
“इक क़ुर्ब जो क़ुर्बत को रसाई नहीं देता,
इक फ़ासला अहसास–ए–जुदाई नहीं देता”
“तू मिला है तो ये अहसास हुआ है मुझको,
ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिए थोड़ी है ….”
“उस पे आती है मोहब्बत ऐसे
झूठ पे जैसे यकीन आता है”

Ghalib shayari on life

“गुज़रे हुए लम्हों को मैं इक बार तो जी लूँ,
कुछ ख्वाब तेरी याद दिलाने के लिए हैं !!”
“गुज़र रहा हूँ यहाँ से भी गुज़र जाउँगा,
मैं वक़्त हूँ कहीं ठहरा तो मर जाउँगा !!”
“एजाज़ तेरे इश्क़ का ये नही तो और क्या है,
उड़ने का ख़्वाब देख लिया इक टूटे हुए पर से !!“यादे–जानाँ भी अजब रूह–फ़ज़ा आती है,
साँस लेता हूँ तो जन्नत की हवा आती है !!”

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